मेरा गांव मेरा गर्व-
मथुरा संग्रहालय में गांव भरनाकलां से खुदाई में प्राप्त यक्षिणी और यक्षराज की मूर्तियां मथुरा संग्रहालय में सुरक्षित रखी गई है। यहाँ उत्खनन से प्राप्त प्राचीन पुरातात्त्विक धरोहर को सहेज कर रखा गया है ताकि आने वाली पीढी उससे परिचित हो सके।
✍️ भवन निर्माण के समय खुदाई के दौरान इन मूर्तियों को प्राप्त किया गया था ( थोक दश विसा से) । शुरुआत में इन मूर्तियों को ग्रामवासियों द्वारा ठाकुर बिहारी जी महाराज मंदिर परिसर में रखा गया, यहां पर इन मूर्तियों के आने के चोर/तस्कर आदि आने लग गए इसके बचाव व धरोहर को सहेजने के उद्देश्य से इन्हें सरकारी अधिकारियों से संपर्क करके इसे संग्रहालय भिजवाया गया। हो सकता जहां से यह मूर्तियां निकली थी कभी उस स्थान पर मंदिर रहा हो या आताताईयों के समय देवमूर्ति को छुपा के रखा गया हो। ज़्यादातर टीलेदार गांव बहुत ही पुराने हैं या फिर कभी रजवाड़ा भूमि रही हो, उस समय की छावनियों तरह प्रयोग करते हों उस स्थान पर इन मूर्तियों का निकलना कौतूहल से कम नहीं। क्या आपने कभी मथुरा संग्रहालय में विजिट किया है?
बकौल ' श्री कैप्टन हरिहर बाबू जी'
"ये दो प्रतिमाऐ स्व. श्री भोलाराम शर्मा के नव निर्मित मकान की नींव की खुदाई में प्राप्त हुई थी।
ग्रामीण नागरिको ने प्रतिमाओं को ले जाकर गाँव के बाहर ठाकुर बिहारी जी महाराज मंदिर के बाहर विशालकाय इमली के पेड के नीचे रखवा दिया था । तत्कालीन गाँव पंचायत प्रधान स्व0 श्री बृह्मानन्द जी थे। उन दिनों मथुरा में कुख्यात बडे-बडे मूर्ति तस्कर प्राचीन मूर्तियों की तस्करी कर विदेश भेजकर मोटी कमाई करने के लिए मशहूर थे। गाँव भरनाकलाँ शहर से बहुत दूर स्थित होने, कच्ची सडक, शिक्षा का अभाव होने, संचार के साधनो का अभाव और अधितर भोले-भाले ग्रामीण व्यक्तियों के कारण इस तरह की जानकारी से अनभिज्ञ था। बिहारी जी महाराज की कृपा से मूर्ति तस्करों को कोई जानकारी हासिल नही हो सकी।
कुछ दिन बाद जब कैप्टन हरिहर शर्मा यानी मैं सेना से अवकाश पर गाँव आया, आकर विशालकाय यक्ष यक्षणीयों की प्रतिमाएं देखी, ग्रामीण नागरिकों को समझाया, गाँव पंचायत प्रधान जी की मुहर लगवाकर पत्र लेकर पहले थाना बरसाना को घटनाक्रम की लिखित जानकारी दी। पुलिस कोई जिम्मेदारी को तैयार नहीं
हुई। तत्काल मथुरा जाकर जिलाधिकारी महोदय को लिखित सूचना दी गई। जिलाधिकारी महोदय के आदेश पर पुरातत्व संग्रहालय डैम्पीयर नगर के अधिकारीगण उसी दिन गाडी लेकर गाँव पहुंचे और दोनो प्रतिमाओ को त्वरित संग्रहालय पहुंचाया गया। पहले इन प्रतिमाओं के प्राप्त होने का स्थान अंकित नही था। कई-कई बार जब भी छुट्टी पर आते, पुरातत्व संग्रहालय विभाग के जिम्मेदार अधिकारीगण और जिलाधिकारी महोदयों से भेंटकर अनुरोध करने पर भी स्थान का नाम अंकित नही हो सका। लेकिन प्रयास करते रहने पर सेवानिवृति पर विश्व हिन्दू परिषद के जिला अध्यक्ष का दायित्व निर्वहन करते समय जिला अधिकारी से निकटता बढी और प्रयास जारी रहे। जुलाई 2003 मे तत्कालीन जिलाधिकारी महोदय डा0 श्री रमाकांत शुक्ला जी के आदेश पर पुरातत्व संग्रहालय के अधिकारीगण ने पिछले अभिलेख रजिस्टर में ढूंढे और गाँव भरनाकलाँ का नाम अंकित किया ।
(राजकीय संग्रहालय मथुरा)पुरातत्व संग्रहालय डैम्पीयर नगर मथुरा तथा सदर तहसील मथुरा के निकट स्थित जैन पुरातत्व संग्रहालय में जितनी भी पुरातत्व महत्व की प्रतिमाऐ हैं उनमें सबसे बडी और विशालकाय प्रतिमाऐ गाँव भरनाकलाँ से प्राप्त हुई दोनो प्रतिमाएं ही हैं। वर्तमान में गाँव के अनेक युवा शिक्षित है, उच्च स्तरीय जॉब और साधन सम्पन्न हैं। Mobile और AI का काल है। सभी को मथुरा , डैम्पीयर नगर स्थित इस गाँव की धरोहर को देखना चाहिए ।
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▪️राजकीय संग्रहालय, मथुरा, जिसे आमतौर पर मथुरा संग्रहालय के रूप में जाना जाता है , भारत में उत्तर प्रदेश राज्य के मथुरा शहर में एक पुरातात्विक संग्रहालय है । संग्रहालय की स्थापना 1874 में मथुरा जिले के तत्कालीन कलेक्टर एफएस ग्राउस ने की थी । शुरुआत में, इसे कर्जन पुरातत्व संग्रहालय, फिर पुरातत्व संग्रहालय और अंत में इसका नाम बदलकर "राजकीय संग्रहालय मथुरा" कर दिया गया।
👉 संग्रहालयों के कुछ प्रकार ये रहे:-
कला संग्रहालय
प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय
विज्ञान संग्रहालय
इतिहास संग्रहालय
मूर्तिकला संग्रहालय
तारामंडल
राज्य इतिहास संग्रहालय
चित्रशाला
बाल संग्रहालय
सैन्य और युद्ध संग्रहालय
🔸 भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण संस्कृति मंत्रालय के अधीन है। संग्रहालयों के माध्यम से कला, इतिहास, वैज्ञानिक या सांस्कृतिक महत्व की वस्तुओं को रखा जाता है । इन वस्तुओं को संरक्षित किया जाता है और जनता के लिए प्रदर्शित किया जाता है । भारत में लगभग 14,201 संग्रहालय है, जिनमें सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, वैज्ञानिक और कलात्मक संग्रह की विस्तृत श्रृंखला प्रदर्शित होती है ।
ओमन सौभरि भुर्रक, भरनाकलां, मथुरा
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