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Wednesday, June 30, 2021

बृजवासी जगदगुरु श्री आनंद कृष्ण जी महाराज

बृजवासी जगदगुरु श्री आनंद कृष्ण जी महाराज : एक परिचय...

जन्मस्थान परिचय:- 
वैदिक आध्यात्मिक , गरिमामयी व्यास परंपरा की विलक्षण वाग्धारा की उत्ताल ऊर्मि के रसमय वाहक " महाराजश्री का जन्म बृजमंडल में श्रीधाम गोवर्धन के निकट भरनाकलांँ नामक ग्राम में महर्षि अंगिरा के प्रपौत्र ब्रह्मर्षि सौभरि के वंश में दिनांक 1 मार्च 1990 को हुआ । आपके पूज्य पिता पंडित श्री बलबीर प्रसाद शर्मा जी एवं माता ललिता देवी निष्ठावान भगवतप्रेमी हैं । महाराज श्री के लघु भ्राता का नाम "बृज रसिक" माधव कृष्ण है जो कि भजनों के माध्यम से श्रोताओं के ह्रदय को बृजभाव में डुबकी लगवाते रहते हैं ।

शिक्षा-दीक्षा:- 
पूज्य महाराज जी के अथक परिश्रम और जनमानस के अपार सहयोग का एकमात्र उद्देश्य है कि निरंतर संपूर्ण भारतवर्ष में ज्ञान सत्संग और आध्यात्म के माध्यम से जनमानस में एकता का संचार करता रहे। महाराज श्री ने अपने माता-पिता के द्वारा बचपन से ही रामायण व श्री कृष्ण चरित्र का मनोयोग से श्रवण किया, आपके पिता आपको उच्च शिक्षा दिलाकर भागवत के एक निपुण प्रवक्ता के रूप में देखना चाहते थे, भागवत के पूज्य सद्गुरुदेव श्री दामोदर त्रिपाठी जी के शुभाशीर्वाद से इसमें शीघ्र सफलता मिली , श्री गुरुदेव के आशीर्वाद से आपने व्याकरण से आचार्य (M.A) एवं शिक्षाशास्त्री ( B.ED ) की डिग्री प्राप्त की है ।

सम्मान व उपाधियाँ:-
महाराजश्री को 'अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा' और 'ब्रह्मकीर्ति रक्षक दल' व ब्रजभूमि कल्याण परिषद के द्वारा, शास्त्रार्थ महारथी श्री पुरुषोत्तम शरण शास्त्री जी, पं. बिहारीलाल वशिष्ठ जी, पं. पंडित श्री शिव कुमार पारीक जी श्रीश्रीवत्स गोस्वामी जी पं. राधा कृष्ण पाठक जी पं. श्री जुगेन्द्र भारद्वाज जी एवं बृजवासी विप्रों एवं रेणुरसिक जनों द्वारा वैष्णव बैठक कुंभ मेला 2021 में शुभ दिनांक 1 मार्च 2021 को (संयोग से इसदिन महाराजश्री का जन्मदिन भी था) 💐बृजवासी जगदगुरु💐 की उपाधि से समलंकृत किया गया । इसके अतिरिक्त महाराज श्री को कल्पतरु सेवा संस्थान के द्वारा "भागवत रत्न सम्मान " ब्रजभूमि कल्याण परिषद के द्वारा "सनातन गौरव सम्मान" व अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के द्वारा" विप्र गौरव" की उपाधि से समलंकृत किया गया है ।

कार्य और मार्गदर्शन:-
महाराज श्री 16 वर्ष की अवस्था से ही श्री कृष्ण कथा एवं राम कथा कह रहे हैं , महाराज श्री मधुर संगीत के साथ शुद्ध हिंदी एवं बृज भाषा में कथा कहते हैं, आपकी कथा शैली इतने सहज एवं सरल है कि सभी श्रेणी के श्रोता आनंद लाभ लेते हैं । महाराज जी 180 से ज्यादा भागवत कथा और 21 से ज्यादा राम कथा का वाचन कर चुके हैं ।
 भजन और कथाओं को सुनने के लिए बड़ी संख्या में कथाप्रेमी इकट्ठा होते हैं I संस्कृत और आध्यात्मिकता के बारे में उनका ज्ञान लोगों को स्वयं का अहसास करने और परम शक्ति के निकटता को महसूस कराता है। महाराज श्री की शास्त्रसम्मत मान्यता है कि भागवत श्री कृष्ण स्वरूप है इसलिए भागवत के किसी भी प्रसंग को बिल्कुल छोड़ना अपराध है , संगीत का माध्यम साथ रहते हुए भी आप कथानक एवं आध्यात्मिक पक्ष पूरा ध्यान रखते हुए कथा कहते हैं।
हिंदू संस्कृति एवं वैदिक सनातन धर्म के प्रचार भावना को लेकर एवं बृज संरक्षण के लिए महाराज श्री एक दीप से अनेकों दीपों को जलाने में लगे हैं और निष्काम भाव से श्री कृष्णकथा एवं श्री रामकथामृत वर्षा करते रहते हैं ।

सेवाभाव व ट्रस्ट:-
महाराज श्री के पावन सानिध्य में, और आप सब के सहयोग से अन्नक्षेत्र , गौ सेवा , वस्त्र एवं दवाओं का मुफ्त वितरण चल रहा है । इसके अतिरिक्त  * भारतीय सप्तर्षि सेवा संगठन'  के नाम से वो ट्रस्ट चलाते हैं ।

TV के माध्यम से कथाओं का प्रचार-प्रसार:-
कई टीवी चैनलों ने उनके भागवत कथा, भजन और प्रवचनों को नियमित रूप से प्रसारित किया।

महाराज जी से जुड़ने के लिए दूरभाष- +91 97193 17960 पर सम्पर्क कर सकते हैं । 
वर्तमान निवास स्थल- वृन्दावन धाम

               💐जय श्री राधे💐



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