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Monday, October 21, 2019

ग्राम पंचायत की जिम्मेदारियां को जानना हरएक ग्रामवासी का अधिकार है ।

ग्राम पंचायत और प्रधान के कामों को जानना हर वोटर व हर एक ग्रामवासियों का मूल अधिकार है ।
ऐसी बहुत सी योजनाएं हैं, जिनके बारे में न तो प्रधान ग्रामीणों को बताते हैं और न ही लोगों को इनके बारे में पता चलता है।

महात्मा गांधी ने कहा था कि "किसी भी देश का विकास तभी संभव है जब उसके गांव सशक्त हों और नागरिक जागरूक हों वो अपने अधिकार व कर्तव्यों को भली भांति समझें।"

 भारत में पंचायती राज के लिए गांवों का कायाकल्प करने  हेतु केंद्र और राज्य सरकार हर साल एक-एक ग्राम पंचायत को लाखों- करोड़ों रुपए देती हैं। इन पैसों से वहां शौचालय, नाली खडंजा, पानी, साफ सफाई, पक्के निर्माण होने चाहिए। गांव में सिंचाई की सुविधा हो ये भी प्रधान का काम है। 
उत्तर प्रदेश में कुल 59,163 ग्राम पंचायतें हैं, प्रदेश में 16 करोड़ लोग गांव में रहते हैं। 
'ग्रामीण भारत' की तरक्की के लिए सरकारें तमाम योजनाएं इन्हीं पंचायतों के जरिए चलाती है। ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव समेत कई अधिकारी मिलकर उस फंड को विकास कार्यों में खर्च करते हैं। अगर आप को जानकारी होगी तो आप न सिर्फ प्रधान से बैठक में पूछ पाएंगे, बल्कि आरटीआई के द्वारा सरकार से भी सवाल कर सकते हैं। ग्राम स्तर पर हर पंचायत के लिए ग्राम सभा से कोष का उपयोग करने हेतु एक प्रमाणपत्र पाना जरूरी होता है जिसके द्वारा ऐसी योजनाओं, कार्यक्रमों और परियोजनाओं का पंचायत द्वारा क्रियान्वयन किया जाता है।

मुख्य रूप से ग्राम पंचायत की होती हैं ये जिम्मेदारियां-

1- ग्राम पंचायत में जितनी भी कच्ची-पक्की सड़कों का निर्माण होता है, सभी ग्राम प्रधान को ही देखने होते हैं, साथ ही पानी निकासी के ड्रेनेज की भी व्यवस्था भी करनी होती है।
 2- गाँव में पशुओं के पीने के पानी की व्यवस्था करना ।
 3- पशु पालन व्यवसाय को बढ़ावा देना, पशुपालन के लिए जानकारी, उनका टीका और उनका उपचार कराना भी पंचायती राज्य के अंतर्गत रखा गया है ताकि पशुपालन ज्यादा फायदेमंद हो। दूध बिक्री केंद्र और डेयरी की व्यवस्था करना, गाँव में पशुओं के लिए चरागाह की व्यवस्था।
4- सिंचाई के साधन की व्यवस्था और बम्बों व नहरों से निकली नालियों की साफ-सफाई का काम भी ग्राम पंचायत को देखना होता है। स्वच्छता अभियान को आगे बढ़ाना, गाँव में सार्वजनिक शौचालय बनाना व उनका रख रखाव करना।
5- ग्रामीण क्षेत्र में नालियों की साफ-सफाई, गाँव में दवाइयों का छिड़काव, साथ एएनएम, आशा बहु टीका लगा रहीं हैं कि नहीं ये भी देखना होता है।
 6- ग्राम पंचायत के सार्वजनिक स्थान, जैसे मंदिर, मस्जिद आदि स्थानों पर लाइट की व्यवस्था करनी होती है, ताकि ऐसे स्थानों पर पर्याप्त उजाला रहे।
7- पंचायत में अलग-अलग धर्म व समुदाय के लोगों के लिए दाह संस्कार स्थल व कब्रिस्तान की देख रेख भी ग्राम पंचायत को करनी होती है। कब्रिस्तान की चारदिवारी का निर्माण भी ग्राम प्रधान को कराना होता है।
8- पंचायत को खेती व किसानी को बढ़ावा देने के लिए समय-समय पर कृषि गोष्ठी करानी होती है, ताकि किसानों को नई जानकारियां मिलती रहें।
दूसरा अगर कोई किसान कृषि क्षेत्र में नया प्रयोग करता है तो उसे प्रोत्साहित करना , जिससे दूसरे किसान भी उनसे जानकारी ले सकें।
9-गाँव में प्राथमिक शिक्षा को बढ़ावा देना भी पंचायत के काम में ही आता है । गाँव में बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए, समय-समय पर जागरूकता रैली निकालने, घर-घर जाकर लोगों को शिक्षा का महत्व समझाना ताकि वो अपने बच्चों को विद्यालय भेजें। बेटियों को बढ़ावा देने के लिए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ स्कीम को आगे बढ़ाना । गरीब बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा की व्यवस्था
10- बच्चों के लिए खेल के मैदान का इंतजाम करना व खेल कूद से सम्बंधित सामान की व्यवस्था करना।
11- गाँव को हरा-भरा बनाने के लिए गाँव की सड़कों और सार्वजनिक स्थान पर पेड़ लगाना और दूसरों को प्रोत्साहित करना, साथ ही उसका उनका रख रखाव करना।
12- ग्राम पंचायत में जन्म मृत्यु विवाह आदि का रिकॉर्ड रखना, जिससे जनगणना जैसे कामों  आसानी आ जाए। इसके बारे में प्रशासन को समय-समय पर सूचित करना होता है।
13- ग्राम पंचायत स्तर पर बच्चों, किशोरियों व गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की होती है, वो काम कर रही हैं कि नहीं, सभी को पोषाहार मिल रहा है कि नहीं ये सब देखने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान की होती है।
14- मनरेगा योजना के तहत तालाबों की खुदाई का काम भी ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी है। अगर किसी ग्रामीण क्षेत्र में नदियां हैं तो उनका संरक्षण भी ग्राम पंचायत के कार्यों में शामिल किया गया । राजकीय नलकूपों की मरम्मत व रख रखाव भी ।
15- समस्त प्रकार की पेंशन को स्वीकृत करने व वितरण का कार्य, समस्त प्रकार की छात्रवृत्तियों को स्वीकृति करने व वितरण का कार्य ।
16- राशन की दुकान का आवंटन व निरस्तीकरण, कोटेदार अगर नहीं दे रहा है राशन तो भी प्रधान से करें शिकायत।
17- गांव में किसी भी अपराध को रोकने के लिए ग्राम प्रधान को पहल करनी चाहिए, जैसे बाल विवाह, सांप्रदायिक दंगा, दहेज के लिए किसी जलाना, जमीन कब्जाना आदि इसमें ग्राम प्रधान की जिम्मदारी रहती है ।


👉ग्राम पंचायत की समितियां और उनके कार्य:- 

1. नियोजन एवं विकास समिति

सदस्य : सभापति, प्रधान, छह अन्य सदस्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिला एवं पिछड़े वर्ग का एक-एक सदस्य अनिवार्य होता है।

समिति के कार्य: ग्राम पंचायत की योजना का निर्माण करना, कृषि, पशुपालन और ग़रीबी उन्मूलन कार्यक्रमों का संचालन करना।

2. निर्माण कार्य समिति
सदस्य: सभापति ग्राम पंचायत द्वारा नामित सदस्य, छह अन्य सदस्य (आरक्षण ऊपर की ही तरह) समिति के कार्य: समस्त निर्माण कार्य करना तथा गुणवत्ता निश्चित करना।

3. शिक्षा समिति
सदस्य: सभापति, उप-प्रधान, छह अन्य सदस्य, (आरक्षण उपर्युक्त की भांति) प्रधानाध्यापक सहयोजित, अभिवाहक-सहयोजित करना।

समिति के कार्य: प्राथमिक शिक्षा, उच्च प्राथमिक शिक्षा, अनौपचारिक शिक्षा तथा साक्षरता आदि सम्बंधी कार्यों को देखना।

4. प्रशासनिक समिति

सदस्य: सभापति-प्रधान, छह अन्य सदस्य आरक्षण (ऊपर की तरह)

समिति के कार्य: कमियों-खामियों को देखना।

5. स्वास्थ्य एवं कल्याण समिति

सदस्य : सभापति ग्राम पंचायत द्वारा नामित सदस्य, छह अन्य सदस्य (आरक्षण ऊपर की तरह)

समिति के कार्य: चिकित्सा स्वास्थ्य, परिवार कल्याण सम्बंधी कार्य और समाज कल्याण योजनाओं का संचालन, अनुसूचित जाति-जनजाति तथा पिछड़े वर्ग की उन्नति एवं संरक्षण।

6. जल प्रबंधन समिति
सदस्य: सभापति ग्राम पंचायत द्वारा नामित, छह अन्य सदस्य (आरक्षण ऊपर की तरह) प्रत्येक राजकीय नलकूप के कमांड एरिया में से उपभोक्ता सहयोजित

समिति के कार्य : राजकीय नलकूपों का संचालन पेयजल सम्बंधी कार्य देखना।

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