मेरा गांव मेरा गर्व:- "पाग" जिम्मेदारी और सामाजिक सम्मान का सूचक है। पाग या पगड़ी जिसे परिवार या समाज के सम्मानित व्यक्ति इसे अपने सिर पर धारण करते हैं। ऐसा नहीं है बिना पाग/पगड़ी पहने किसी को सम्मान की नजर से नहीं देखा जाता हो। समय के ढलते बहाव में धीरे-धीरे यह प्रतीक उन सम्मानित जनों के लिए भी विशिष्ट आयोजनों/अवसरों का आडंबरधर्मी प्रतीक बनकर ही रह गया है। गांव के उन्नायकों को स्वजाति अवंटक/अल्ल विशेष की लकीर पर डटे रहने के बजाय इस दिशा में समय के अनुसार अद्यतन करते रहना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हो पाता। अपनी सांस्कृतिक धरोहरों पर गर्व करना अच्छी बात है, पर उन्हें जानना जरूरी है कि इनका चलन किस आधार पर चला। परंपरा को जाने बगैर कोई भी उसका समुचित सम्मान नहीं कर सकता।
👉इस प्रकार भरनाकलां गांव में पहले से प्रचलित बड़ा थोक दश विसा (१४ पाग)+पल्ला थोक{ढाई विसा+सवा विसा (१४)}=२८ । भरनाकलां गांव में "पाग" बरगला/नुक्ते (अल्ल/अवंटक) के कुछ परिवारों को पारंपरिक तौर पर दी जाती रही है । ये निम्नलिखित हैं -
🔸दश विसा के पागों (पागियों की) संख्या:-
1 अटावाले
2 मुकदम परिवार
1 हडीला परिवार
1 फरसा वाले
1 सट्ठा परिवार
2 पचौरी परिवार
1 मुखिया जी
1 मोहन गुरु जी
1 भैमी परिवार
1 अटीलेवाले
2 मिश्री बाबा
Total= 14
🔸ढाई विसा और सवा विसा (दोनों थोक):-
2 नैवासी, 1 कुसैंड़ा, 3 सेलवारे, 1 लम्बरदार, 2 मुकदम , 1 खिल्लू बाबा, 3 नंदा बाबा, 1 कमरावाले ।
Total= 14
🔸इसके अतिरिक्त भरनाकलां गांव में इटोइयां उपगोत्र (अल्ल/अवंटक) के हर परिवार की भी अपनी एक पाग है। इस परंपरा का निर्वाह अभी हाल के कुछ ही वर्षों से हुआ है। इनकी संख्या शायद २४ अथवा ३६ है।
▪️पागधारकों को नेग/उपहार बतौर कुछ ना कुछ देने का रिवाज है- यह विवाह आदि के शुभ अवसरों पर कुछ धन/ वर्तन आदि देने की प्रथा है। कुछ हिस्सा, भेंट, शादी ब्याह में रिश्तेदारों से मिलने वाली शगुन की कुछ राशि इन पागधारियों को बतौर सम्मान दी जाती है । गांव, गोत्र, सतगामा, अठगामा, बारहा(बारह गाँव), खाप तथा पाल़ आदि के चौधरियों को भी हरियाणवी लोकजीवन में पगड़ी बांधने की परंपरा रही है, इतना ही नहीं, यहां पर ब्याह-शादी तथा अन्य अवसरों पर रूठे हुओं को मनाने के लिए पगड़ी उतारकर अंतिम प्रयास के रूप में मनाने की परम्परा अब भी कहीं-न-कहीं दिखाई पड़ती है। राजस्थान में भी पाग अन्य राज्यों से अधिक प्रचलन में है।
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✍️ अपने गांव के कुछ तथ्यों को जानना अच्छी बात है जैसे हमारे गांव का नाम भरनाकलां है इसका अर्थ क्या है? भरनाकलां शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है, भरना और कलां, भरना का मतलब है स्थापना और कलां शब्द फारसी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ होता है बड़ा । इस प्रकार भरनाकलां का अर्थ होता है बड़ी स्थापना या बड़ी बस्ती। जैसे छोटा भरना या भरनाखुर्द जिसका अर्थ है छोटी बस्ती। ये शाब्दिक अर्थ है लेकिन समय/काल के चलते वर्तमान में इन नामों (कलां/खुर्द)के गांव की जनसंख्या कम - ज़्यादा हो सकती है।
किसी गांव का नाम सुनने पर स्वाभाविक जिज्ञासा होती है कि उसका नाम कैसे पड़ा होगा । अमूमन हम इन प्रश्नों को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन जब हम ऐसा करते हैं तो क्या उस स्थान से जुड़े ऐतिहासिक-सांस्कृतिक संदर्भों को विस्मृति की खाई में नहीं धकेल देते हैं लेकिन इतिहास के मामले में कई बार हम इतने अभिजनवादी हो जाते हैं कि अपने ही पूर्वजों के इतिहास को नजरअंदाज कर जाते हैं । उनकी जिजीविषा और ज्ञान परंपरा से खुद को दूर कर लेते हैं । किसी गांव के नाम की व्युत्पत्ति के द्वारा उसके इतिहास को समझने की कोशिश के बहुत कम उदाहरण हैं । हमारे जनमानस में यह बात बैठी हुई है कि किसी स्थान या जगह को राजा-महाराजा या प्रभुत्वशाली लोगों द्वारा ही बसाया जाता है । ऐसा नहीं है ये कोई भी हो सकते हैं लेकिन हैं तो हमारे पूर्वज या उनसे संबंधित।
ओमन सौभरि भुर्रक, भरनाकलां, मथुरा
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