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Sunday, August 8, 2021

Business Tycoon pandit Shobharam Sharma ji


वर्तमान ब्लॉकप्रमुख, भूतपूर्व ग्राम प्रधान भरनाकलां, राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिल भारतीय सौभरेय ब्राह्मण संघ, व बिजनेसमैन शोभराम शर्मा जी का जन्म सन्... में ब्रज मंडल मथुरा जिले के गॉंव भरनाकलां में आदिगौड़ अहिवासी ब्राह्मण  परिवार में हुआ था । 


इनके पिता पं. श्री राधेश्याम भगत जी हैं। भगत जी नित्य प्रति श्री गिरिराज पर्वत (गोवर्धन महाराज) की परिक्रमा करते हैं । सन्... में शर्मा जी ने ... स्कूल से  शिक्षा प्राप्त की ।

 वो कहते हैं ना कि मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती ठीक इसी तरह यह बात भी शर्मा जी के जीवन में भी सत्य साबित हुई । सन ... में शोभाराम जी अपना बिज़नेस एक टेम्पू से शुरू किया लेकिन काम ज्यादा चला नहीं साथ में खेतीबाड़ी का तो पुश्तैनी काम था ही और गाँव में कुछ दिनों बाद चुनावों के दौरान वो ग्राम प्रधान चुने गए । यहाँ से इनकी जिंदगी गेम चेंजर की तरह बदल गयी फिर कभी वापस मुड़के नहीं देखा इसके बाद शर्मा जी सन...... में pwd के ठेकेदार बन गए । आपने देश के कई प्रदेशों के शहरों व ग्रामों में सड़क का निर्माण कराया । आपका वर्तमान निवास स्थल आनंदवन मथुरा है ।

 हाल ही में आपकी पत्नी श्रीमती जमुना देवी जी ब्लॉक चौमुहा से ब्लॉक प्रमुख का चुनाव जीतकर स्वसमाज का नाम गौरवान्वित किया है । इससे पहले स्वसमाज के मथुरा जिले के 12 गांवों से कोई भी स्वजन इस पद को नहीं जीत पाया था । आपके पास अब प्रशासनिक, राजनैतिक, व्यापार इत्यादि का बड़ा मजबूत अनुभव है । ग्रामवासियों व क्षेत्रवासियों को आपसे विकास की बहुत उम्मीदें हैं ।
आपका परिवार पहले से ही भागवत प्रेमी व साधुसंगत रहा है ।  काठिया बाबा महंत श्री श्री डोरी बाबा का आपके ऊपर हमेशा आशीर्वाद बना रहता है । वृन्दावन के महंत व साधु-संतों को धर्म के प्रचार-प्रसार हेतु फ़ॉर व्हीलर भी भेंट की ।
पिछले कई महीनों पहले मिनी कुंभ वृन्दावन में हरिप्रिया शरणदास जी महाराज, डोरी बाबा आश्रम में हुई श्रीमद भागवत कथा के दौरान मुख्य यजमान की भूमिका में रहे ।


 आपके 3 भाई और 1 बहिन है । आपके ... पुत्र व ... पुत्रियां हैं ।
 आपके पास ... अरब मूल्य की संपत्ति है, जिसके अनुसार आप गॉंव के  सबसे धनी व समृद्ध व्यक्ति हैं और जिले में आप top 20 की लिस्ट में आते हैं ।
आप  कंस्ट्रक्शन कंपनी SRSC के फाउंडर हैं । जिसमें करीब 100 से ज्यादा वर्कर काम करते हैं ।

आपका आसपास के क्षेत्र में सबसे बड़ा व्यापारिक घराना है। आपकी भागीदारी स्वसमाज के मुख्य कार्यक्रमों रहती है रहती है ।आप अखिल भारतीय सौभरेय ब्राह्मण संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद आसीन हैं । वार्षिक होली मिलन समारोह व स्वसामाजिक कार्य आपकी देख-रेख में होते हैं ।


श्री शोभाराम शर्मा जी की धर्मपत्नी श्रीमती जमुना देवी  जी को चौमुहां ब्लॉक की प्रमुख निर्दलीय/निर्विरोध निर्वाचित होने पर बहुत-बहुत हार्दिक बधाई


स्वसमाज में पहली बार ब्रज रीजन से माता जी के देहावसान के बाद सम्पूर्ण मथुरा जिले का विशाल महाभोज कराकर पुण्य की प्राप्ति की । ऐसा विशाल कार्यक्रम गाँव में क्या अपितु आसपास के क्षेत्र में हुआ ही नहीं था । सम्पूर्ण भोज की दावत की सिकाई घी में हुई थी । इतनी बडे कार्यक्रम में इतनी उचित व्यवस्था देखते ही बनती थी । उस दिन के दौरान सम्पूर्ण मथुरा जिला भरनाकलांमय हो गया था ।

इनका गाँवप्रेम भी किसी छिपा नहीं है, इतनी व्यस्त जिंदगी होने के बाबजूद भी गाँव की तरफ़ इनका मन हमेशा बना रहता है, गाँव के कुछ विकास कार्य इनकी निष्काम सेवा का प्रतीक है । जैसे- ग्राम की मुख़्य परिक्रमा के चौड़ीकरण का काम जारी है ।इस रास्ते को गोवर्धन-छाता रोड तक काम से कम 20 फ़ीट चौड़ा करते हुए बना रहे हैं ।इसके अतिरिक्त अभी हाल ही में भरनाकलां में लगभग 2 एकड़ में श्मशान भूमि की मिट्टी डलवाकर बाउंडरी वॉल का निर्माण कार्य प्रगति पर है और छोटा मंदिर जिसे राधाकृष्ण मंदिर के नाम से जाना जाता है उसके पीछे तालाब की बाउंडरी का भी कार्य प्रगति पर है । आमतौर पर ग्रामवासी उस तालाब को नधा के नाम से उच्चारित करते हैं । कुल मिलाकर शर्मा जी ने ब्लॉक प्रमुख बनने के बाद विकास की झड़ी लगा रखी है ।


साभार:-ओमन सौभरि भुर्रक, भरनाकलां, मथुरा

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शौर्यचक्र विजेता शहीद कैप्टन राकेश शर्मा


मेरा गांव मेरा गर्व - 

एक राष्ट्र की असली ताकत उसके सैनिकों के समर्पण में होती है । असीम साहस और निस्वार्थ भाव से देश की रक्षा और सेवा करने वाले उन बहादुर जवानों को प्रणाम करना चाहिए। भारतीय सेना की बहादुरी और बलिदान को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता ।

ऐसे ही एक वीर बलिदानी श्री कैप्टन राकेश शर्मा का जन्म 25 मई 1966 को उत्तर प्रदेश में मथुरा जिले के गांव भरनाकलां तहसील गोवर्धन हुआ था। भारतीय सेना के दिग्गज कैप्टन हरिहर शर्मा जी के बेटे, कैप्टन राकेश शर्मा ने अपनी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा झांसी और बरेली से की। बाद में उन्होंने 05 जुलाई 1976 को छठी कक्षा में राजस्थान के मिलिट्री स्कूल धौलपुर में प्रवेश लिया। यहीं पर उनके भविष्य के सैन्य करियर की नींव रखी गई थी। बारहवीं कक्षा पूरी करने के बाद, उन्होंने पुणे से स्नातक की पढ़ाई की और अपना एनसीसी "सी" प्रमाणपत्र भी हासिल किया।

वर्ष 1986 में, उन्होंने NCC दल के हिस्से के रूप में गणतंत्र दिवस परेड में भाग लिया और उन्हें राष्ट्रपति द्वारा सर्वश्रेष्ठ कैडेट के रूप में सम्मानित किया गया। उनका बचपन से ही सशस्त्र बलों में शामिल होने का मन था और बड़े होकर अपने सपने का पालन करना जारी रखा। आखिरकार उनका सपना सच हो गया और स्नातक होने के बाद उन्हें सेना में शामिल होने के लिए चुना गया। वे आईएमए देहरादून गए और 23 वर्ष की आयु में 10 जून 1989 को लेफ्टिनेंट के रूप में पद प्राप्त किया। उन्हें मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री रेजिमेंट की 17 Mech Inf बटालियन में पद मिला, जो एक इन्फैंट्री रेजिमेंट है जो अपने निडर सैनिकों और कई युद्ध कारनामों के लिए जानी जाती है।

 एक बार कश्मीर में आतंकी और और आतंकवाद को खत्म करने के लिए पोस्टिंग हुई । संदिग्ध शिविर लगभग 11000 फीट की ऊंचाई  पर स्थित था। कैप्टन राकेश शर्मा ने एक ऐसे मार्ग का अनुसरण करते हुए फीचर को स्केल करने का फैसला किया जिसने आश्चर्य का एक तत्व सुनिश्चित किया। कैप्टन राकेश शर्मा ने 04 मार्च 1995 की सुबह एक अधिकारी, 4 जेसीओ और 65 अन्य रैंकों की एक टीम का नेतृत्व करते हुए ऑपरेशन शुरू किया। कैप्टन राकेश शर्मा और उनके आदमियों ने अचंभित करने में कामयाबी हासिल की और इलाके की घेराबंदी कर दी। चेतावनी जारी करने पर, जब आतंकवादियों ने आत्मसमर्पण नहीं किया, तो एक भीषण गोलीबारी शुरू हो गई। हालांकि एक आक्रामक हमले के बाद बड़ी संख्या में आतंकवादियों ने अंततः आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद कैप्टन राकेश शर्मा ने बचे हुए तत्वों से निपटने के लिए मॉपअप ऑपरेशन के लिए कैंप में प्रवेश किया। वह जल्द ही दो छिपे हुए आतंकवादियों के हमले की चपेट में आ गये, जिन्होंने अपने स्वचालित हथियारों से उस पर गोलीबारी की। कैप्टन राकेश शर्मा तुरंत हरकत में आए और उनमें से एक का सफाया कर दिया और दूसरे को घायल कर दिया। हालांकि दूसरा आतंकी पलटने में कामयाब रहा और कैप्टन राकेश शर्मा को गोली मार दी। साथ ही 7 विदेशी खूखार आतंकवादियों को मौत के घाट उतार कर माँ भारती की रक्षार्थ बलिदान देने में भी पीछे नहीं हटे। कैप्टन राकेश शर्मा गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में उन्होंने दम तोड़ दिया। कैप्टन राकेश शर्मा एक बहादुर सैनिक और शूरवीर अधिकारी थे, जिन्होंने भारतीय सेना की सर्वोच्च परंपराओं का पालन करते हुए अपने कर्तव्य की पंक्ति में 28 वर्ष की आयु में आगे बढ़कर नेतृत्व किया और अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। कैप्टन राकेश शर्मा को उनके असाधारण साहस, नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान के लिए महामहिम राष्ट्रपति महोदय द्वारा वीरता सम्मान, "शौर्य चक्र" दिया गया। भारतीय सैनिक अपनी आखिरी सांस तक लड़ते हैं, इसलिए नहीं कि वे अपने सामने वालों से घृणा करते हैं बल्कि इसलिए क्योंकि वे अपने पीछे खड़े लोगों से प्यार करते हैं ।

तू शहीद हुआ,
तो न जाने,
कैसे तेरी माँ सोयी होगी?
लेकिन एक बात तो तय है कि ...
तुझे लगने वाली गोली भी,
 सौ बार रोयी होगी !

अपने गांव भरनाकलां में मां भारती के ऐसे सपूत कैप्टन राकेश शर्मा जी को समर्पित शहीद स्मारक बनाया गया है जहां जिले अन्य सभी शहीदों के नाम भी पट्टिका पर अंकित हैं। आज देश के युवाओं के लिए वो एक प्रेरणास्त्रोत हैं।

उत्तर प्रदेश की पूज्य योगी जी की सरकार ने 
27 कि0 मी0 गोवर्धन-छाता सडक का नामकरण शौर्यचक्र विजेता शहीद कैप्टन राकेश शर्मा जी के नाम से कर के बृजभूमि व स्वसमाज को गौरवान्वित किया है । 

बलिदानियों के नाम से उनके सम्मान में गांव का मुख्य द्वार  "वीर द्वार" भी बनवाया जाए तो और अच्छा है।






साभार:-ओमन सौभरि भुर्रक, भरनाकलां, मथुरा

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Wednesday, August 4, 2021

राधा-कृष्ण मंदिर (छोटा मंदिर), सवा विसा भरनाकलां

राधा-कृष्ण  मंदिर (छोटा मंदिर), सवा विसा भरनाकलां-

श्री राधाकृष्ण मंदिर (छोटा मंदिरसवा विसा में नधा तालाब के समीप स्थित है । वास्तु के हिसाब से इसका प्रवेश द्वार पूर्व दिशा में है जो कि बहुत ही शुभ माना जाता है । मन्दिर के मुख्य दरबार में विराजमान श्री राधा कृष्ण जी है । मंदिर में स्थित बहुत ही भव्य व मनमोहक मुर्तियां जो लोगों का मन मोह लेती हैं । मंदिर के पास 12 बीघा भूमि है जिसके मालिक स्वयं प्रेमी युगल स्वरूप श्री राधाकृष्ण जी ही हैं । मंदिर की खेतीहर भूमि को कृषि के लिए वार्षिक पट्टे पे उठाया जाता है ।
मंदिर का निर्माण सवा विसा भरनाकलां के लोगों ने ही मिलकर किया था। अब से कुछेक वर्ष पहले ही मंदिर का पुनर्निर्माण कराया गया है जिसमें सम्पूर्ण मंदिर में ग्रेनाइट पत्थर का प्रयोग गया है । मंदिर के द्वार पर भव्य स्वागत करती मुर्तियां लगाई गई हैं । यह मंदिर ग्राम की परिक्रमा में पड़ता है । ग्रामवासी जब गॉंव की परिक्रमा करते हैं तो अवश्य ही इस मंदिर में दर्शन के लिए जाते हैं । मंदिर प्रांगण में मंदिर कमेटी द्वारा वार्षिक 'श्रीमद भागवत कथा' का आयोजन होता है ।

                       महंत- उड़िया बाबा

सवा विसे में स्थित श्री राधाकृष्ण मंदिर (छोटा मंदिरके महंत श्री उड़िया बाबा जिनका हाल ही में मुक्तिधाम को चले गए हैं जो लगभग 50 वर्षों से मंदिर के मुख्य पुजारी थे । युवावस्था से ही वो ग्राम भरनाकलां में रहे, अन्यत्र कहीं नहीं गए । वो नाटे कद के थे और वो ऐसी विद्या जानते थे लोग किसी वस्तु की चोरी या खो जाने पर *पूछा  वाले* के पास जाते थे, लेकिन उड़िया बाबा इस मसले का हल मंदिर से बैठे-बैठे ही कर देते थे वो बता देते थे कि फल चीज वहाँ मिल जाएगी या इतने दिनों के बाद मिल जाएगी । 

निजग्राम भरनाकलां निवासी 'ब्राह्मण ओमन सौभरि भुर्रक'

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