ओमन सौभरि भुर्रक, भरनाकलां, मथुरा
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यहाँ पर गाँव के प्रगतिशील युवा व अन्य लोगों की एक टेंटेटिव सैलरी लिस्ट जारी की जा रही है हालांकि ये सब कॉन्फीडेंश्यल बात होती है । फिर भी आगे आने वाले बच्चों के आप प्रेणनाश्रोत हो सकते हैं । अभी इस लिस्ट में गांव के स्वजातीय लोगों 60-70% का आंकड़ा है, जो पता था(अंदाजे से) ।
उमेश:- 23-24 लाख, पलवल, अटीलेवाले
बालकिशन:- 15-16 लाख, गुरुग्राम हडीला
भुवनेश्वर:- 13-14 लाख, फरसा वाले गुरुग्राम
ठाकुर लाल:- 12-13 लाख, भैमी गुरुग्राम
राजेन्द्र :- 12-13 लाख, डोरी इटोइयाँ नोएडा
नरेश:- 12-13 लाख, नीमवाले जयपुर
नटवर:- 14-15 lakh कमरावाले लाख
महेश:- 3.5 लाख, भुर्रक (लल्लू काका जी) नोएडा
कन्हैया:- 3-4 लाख, भुर्रक इंदौर पटवारी
देवेंद्र:- 3-4 लाख फरसा वाले
देवेन्द्रकुमार कमरा वाले ballabgarh 3-4 lakh
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बनवारी:- 6-7 लाख, सलेमपुर वाले दिल्ली
जगदीश शर्मा जी:- 9-10 लाख अटीलेवाले पलवल
मुकेश:- 6-7 लाख, अटीलेवाले अलवर
खूबी:- 4-5 ओमी इटोइयाँ लाख
प्रेमशंकर:- 3-4 लाख, अटीलेवाले फरीदाबाद
बलराम:- 3-4 लाख, दुर्गा बैंक वाले दिल्ली
हरिओम:- 4-5 लाख, रग्गो दादा दिल्ली
महादेव:-3-4 लाख, सेलवाले बल्लभगढ़
महेश:- 3-4 लाख, सेलवाले बल्लभगढ़
गोविन्दा:- 5-6 लाख, कमरावाले बल्लभगढ़
सुभाष:- 4-5 लाख, सेलवाले बल्लभगढ़
डोरीलाल:- 6-7 लाख, कमरावाले बल्लभगढ़
मेघश्याम:- 5-6 लाख, कमरावाले बल्लभगढ़
देवकी:- 6-7 कुम्हेरिया लाख
हरिओम:- 6-7 अटावाले लाख
राजेश:- 5-6 कुम्हेरिया लाख
विनोद:- 5-6 कुम्हेरिया लाख
हेतू:- 3-4 मुकदम लाख
दिनेश:- 2.5-3 लाख सलेमपुर वाले etc...
Anil:- 5-6 lakh चंद्रमोहन जी, म.प्र.
Anil:- 3-4 lakh अक्खड़, मथुरा
Ram avatar:- 4-5 lakh नैवासी, गुड़गांव
Vishnu:- 10-11 lakh पंडा जी, पुणे
Radhakrishna:- 4-5 lakh सट्ठा पलवल
Ganga sharan ji:- 24-25 lakh मुकदम दिल्ली
Rohitash:- 5-6 lakh अटावाले मथुरा
Devsharan:- 5-6 lakh नम्बरदार
Kanhaiya lal:- 4-5 lakh नैवासी दिल्ली
Raju:- 3-4 lakh दरिया
Dinesh:- 3-4 lakh ताऊ
Vishnu:- 4-5 lakh पटवारी
Vinay:- 4-5 lakh पटवारी
Jaydev:- 6-7 lakh रामकुमार इटोइयाँ
Mukesh:- 4-5 lakh कुम्हेरिया
Jacky:-- 3- 4 lakh सेलवाले
Sanjay:-- 3-4 lakh पारुआ
Bheem:- 3-4 lakh नायक वाले
रामगोपाल कमरावाले ballabgarh, 7-8 lakh (bsc bio मेडिकल line)
भूपेंद्र कमरा वाले ballabgarh (b.tech electrical) 3 lakh,
परशुराम कमरावाले ballabgarh , btech machenical 3- 4 lakh
Banke 4-5 lakh कांईयां
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राजाराम मा.साहब 8-9 लाख सेलवाले
रामकृष्ण मा.साहब:- 7-8 लाख कमरावाले
देवेश:- 17-18 लाख, गुजरात सलेमपुर वाले
रमाकांतजी:- 7-8 लाख, गाजियाबाद हडीला
वीरनारायण:- 6-7 लाख कलक्टर
भगवत मा. साहब-7-8 लाख, कुम्हेरिया
जयदेव जी:- 5-6 लाख, मथुरा कुम्हेरिया
हरिओम:- 7-8 लाख, मथुरा अटावाले
सुरेश:- 7-8 लाख, महाराष्ट्र अटीलेवाले
नारायण जी:- 7-8 लाख, मथुरा etc... अटावाले
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शोभराम जी- 10-12 करोड़ कुषैणा
संजय जी:- 1- 2 करोड़ कुषैणा
हरिहर जी:- 1-2 करोड़ कुषैणा
श्याम सुंदर:- 23-24 लाख, सट्ठा, नोएडा
गोपाल:- 12-13 लाख, सट्ठा , नोएडा
सोनू :- 9-10 lakh काइयाँ, नोएडा
विष्णु:- 6-7 लाख, सट्ठा , दिल्ली
विष्णु:- 5-6 लाख, सलेमपुर वाले, दिल्ली
कन्हैया:-7-8 लाख, वाइन ठेका, गोर्कीबाबा, शेरगढ़ ।
ओमप्रकाश:-4-5 लाख, भुर्रक
हेतरामबाबू:- 6-7 लाख, मुकदम etc...
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भीमसेन जी:- 6-7 लाख सलेमपुर वाले
हरिओम जी:- 3-4 लाख भैमी
हरिओम जी:- 4-5 लाख कुम्हेरिया
महादेव जी:- 4-5 लाख ताऊ
हरदयाल जी:- 4-5 लाख पधान
सत्यदेव जी:- 3-4 लाख सट्ठा
मेघश्याम जी:; 3-4 लाख इटोइयाँ
आनंद जी:- 6-7 लाख etc... अटावाले
Ramakant ji:- 4-5 lakh इटोइयाँ
Liladhar ji:- 4-5 lakh इटोइयाँ
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भरनाकलां गाँव की जमीन:- लगभग 2000 एकड़(3700 बीघा)
स्वसमाज का परसेंटेज=80% (2800 बीघा)
1 बीघा से वार्षिक आय लगभग= 5000
2800 बीघा से= 14 करोड़
अगर 200 व्यक्तयों की औसतन आय 6 लाख सालाना मां लें तो= 12 करोड़ वार्षिक
*इसमें और भी कंस्ट्रक्शन कॉन्ट्रैक्टर्स व छोटे-बड़े कारोबारियों को शामिल नहीं किया है ( due to have no idea...)
ओमन सौभरि भुर्रक, भरनाकलां, मथुरा
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मेरा गांव मेरा गर्व-
कुआ व कुइओं का संरक्षण व संवर्धन होते रहना चाहिए ।
भरनाकलां गांव के आसपास के कुइया व कुओं का पानी खारी है, इन जलस्रोतों की खुदाई के समय से या कालांतर में जल की प्रकृति खारी हो गयी, पूर्णरूपेण कह नहीं सकते लेकिन फिलहाल गांव व गांव के आसपास की भूमि पर बने सभी जलस्रोत बहुत खारी हैं । हमारे पूर्वज जल संरक्षण के लिए कुआं खुदवाते थे। हर गांव में 10 से 15 कुआं होते ही थे। पुराने समय में जब बारात बगैराह आती थीं तो नेग के तौर पर या सेवाभाव के अनुसार कुछ कुआ और कुइयाओं के लिए लोटा , बाल्टी देने का रिवाज हुआ करता था । परम्परागत दृष्टि से कुआ, कुइया, पोखर खुदवाने की क्रिया को हमेशा से ही पुण्यकर्म की श्रेणी में रखा जाता रहा है । पारम्परिक जलस्रोत अतीत में पेयजल आपूर्ति में सक्षम थे, लेकिन आज आधुनिकता का शिकार होकर साल दर साल बंद होने की कगार पर हैं।
हमारे गांव भरनाकलां के कुइआ व कुओं का विवरण:-
1-*फत्ती वाली कुइया(मीठी कुइया)*- सड़क के किनारे बम्बी पर स्थित है, कभी इस कुइया से सम्पूर्ण की ग्राम की स्वजातीय महिलाएं नीर भरण के लिए आती थीं, जब से पाइपलाइन की व्यवस्था ग्राम में हुई है तब से यह परम्परा बन्द हो गयी । फिलहाल कुइया अभी चालू हालत में है ।
2- बघेलों वाली कुइया- छाता-गोवर्धन रोड पर स्थित है फिलहाल इससे नीरभरण बंद है।
3- हरिजनों वाली कुइया- ये कुइया भी पास में ही है इसी रोड पर । फिलहाल बन्द पड़ी है ।
4- जाटवों वाली कुइया- भंगियों वाली कुइया के पास स्थित है । अभी पानी भरना बन्द है ।
5- दर्जियों वाली कुइया- स्कूल फार्म के पास , पानी भरना बन्द ।
6- बलवीर भगत जी वाली कुइया- स्कूल फार्म के सामने , कभी-कभार प्रयोग लेते हैं ।
7- रग्गो दादा वाली कुइया- बन्द
8- प्याऊ वाली कुइया (खारी कुइया)- नहाने के लिए अभी चालू हालत में है ।
9- गांव वाली खारी कुइया- फिलहाल पाट दी गयी है । कभी यह दश विसे की औरतों के नहाने की मुख्य कुइया और भैंसों की सानी करने के लिए पानी की मुख्य धारा थी।
10- सरकारी स्कूल वाला कुआ- फ़िलहाल पटा हुआ है ।
11- मरघट वाला कुआ- बन्द पड़ा है ।
12- भैंमी बाबा वाला कुआ- कभी-कभार प्रयोग में ।
13- गौरी इटोइयाँ जी वाली कुइया- बंद पड़ी है ।
14- अटीलेवालेन वाला कुआ- बम्बा पर स्थित है, कभी-कभार उपयोग में
15- मुकदमों वाली कुइया(दश विसा)- बन्द पड़ी है ।
16- मुकदमों वाला कुआ(दश विसा)- अटा दिया गया ।
17- हवेली वाली कुइया- चालू हालत में, पर कम उपयोग में
18- सट्ठान वाली कुइया- लीडो बम्बी के पास छाता-गोवर्धन रोड पर स्थित है । ना के बराबर उपयोग में
19- नैवासीन वाली कुइया- भरतपुर फीडर बम्बा पर स्थित है, अभी चालू हालत में ।
20- बाबाजी वाला कुआ- उपयोग में नहीं
21- कुम्हेरियन वाली कुइया
22- मन्ने वालेन की कुइया
23- कमरावालेन वाला कुआ
24- काइयाँन वाली कुइया
25- सेलवालेन वाली कुइया
26- बड़े मंदिर के पीछे वाला कुआ- बंद पडा है ।
27- मढ़ी वाला कुआ- पोखर के पास, बंद पड़ा है ।
28- नाले के पास वाला कुआ- बंद पड़ा है ।
29- मुहारी वाली कुइया कभी- कभार उपयोग में ।
30- नहर वाली कुइया-
31- मुखिया वाली कुइया
30- पारुआ वाली कुइया
31- कलेट्टर जी वाला कुआ (नद्या)
32- खिल्लू बाबा वाली कुइया
33- नम्बरदारन वाली कुइया
34- अक्खड़ों वाली कुइया
35- स्कूलफार्म वाली कुइया, पाट दी गयी
36- चरन मास्टर जी वाली कुइया
37-चंदा जी वाली कुईया
38- सोना वारी कुईया
39- गुल्लनपंडा जी वाली कुइया
इसके अतिरिक्त गांव में और भी कुइआ व कुआ हो सकते हैं जितना मालूम था उतना लिख दिया है।
🔸 आज स्थिति यह है कि गांव में चलते हुए एक-दो कुआं मिल जाए तो समझे की जल संचय की दिशा में अब भी ग्रामीण जागरूक हैं। पहले कुआं के पानी से भोजन बनाने, पानी पीने एवं पूजा करने का काम होता था। हमारी संस्कृति कुआं के पानी को शुद्ध मानती है। कुएं को कूप भी कहा जाता है । कुएं को खोदकर, ड्रिल करके, या बोर बनाया जाता है । कुएं को जीवन और उर्वरता का प्रतीक माना जाता है । कुएं के पानी का महत्व कम होता जा रहा है । कुएं का पानी पीने के साथ-साथ सिंचाई के लिए भी इस्तेमाल किया जाता था । कुएं के पानी पर पर्यावरण में होने वाले बदलावों का असर पड़ता है । जब पेयजल व्यवस्था चरमरा जाती है, तब इन कुओं की उपयोगिता बढ़ जाती है। लोग कुआं और हैंडपंप के माध्यम से पेयजल एवं निस्तार जल का उपयोग करते हैं। दो दशक पहले जब हैंडपंपों की कमी और नलजल योजना का अभाव था तब कुआं ही ऐसा साधन था।
हिंदू धर्म में कुआं पूजन की परंपरा का विशेष महत्व होता है। कुआं पूजन पुत्र प्राप्ति पर किया जाता है। साथ ही यह ग्रह-नक्षत्रों को शांति के लिए भी किया जाता है। खासतौर से मूल नक्षत्रों में जन्मे बच्चों के लिए यह पूजा जरूरी मानी गई है। कई स्थानों पर इसे जल पूजा या जलवा पूजा भी कहा जाता है। रिक्ता तिथि यानी शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की चतुर्थी, नवमी और चतुर्दशी को छोड़कर, अन्य किसी भी तिथि पर कुआं पूजन संस्कार किया जा सकता है। वहीं, कुआं पूजा के लिए सोमवार, बुधवार और गुरुवार का दिन अच्छा माना गया है। साथ ही चैत्र और पौष चंद्र महीनों को छोड़कर, सभी चंद्र महीने कुआं पूजा अनुष्ठानों किया जा सकता है। मृगशीर्ष, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, मूल और श्रवण नक्षत्र भी कुआं पूजन संस्कार के लिए अच्छे माने जाते हैं। हिंदू धर्म में शादी-विवाह संस्कारों में भी बच्चे का कुआं पूजन किया जाता है। कुएं पूजन समारोह आमतौर पर नवजात शिशु के जन्म के 11वें दिन किया जाता है ।
▪️कुएं का आकार हमेशा गोल होता है:-
किसी दूसरे आकार की तुलना में गोल कुआं ज्यादा मजबूत होता है और अपनी जगह पर स्थिर रहता है। आपको बता दें कि जब भी किसी द्रव को कहीं भी स्टोर किया जाता है तो द्रव उसकी दीवारों पर प्रेशर डालता है। अगर कुआं किसी अन्य आकार का होता तो पानी का प्रेशर उस आकार के कोनों की दीवारों पर सबसे ज्यादा पड़ता जिसकी वजह से कुएं की दीवारों को नुकसान भी पहुंचता है।गोल होने की वजह से कुएं में कोई भी कोना नहीं होता है। जिस वजह से पानी का प्रेशर भी हर तरफ एक समान ही पड़ता है और कुएं को जल्दी कोई भी नुकसान नहीं होता है।
ओमन सौभरि भुर्रक, भरनाकलां, मथुरा
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मेरा गांव मेरा गर्व:- "पाग" जिम्मेदारी और सामाजिक सम्मान का सूचक है। पाग या पगड़ी जिसे परिवार या समाज के सम्मानित व्यक्ति इसे अपने सिर पर धारण करते हैं। ऐसा नहीं है बिना पाग/पगड़ी पहने किसी को सम्मान की नजर से नहीं देखा जाता हो। समय के ढलते बहाव में धीरे-धीरे यह प्रतीक उन सम्मानित जनों के लिए भी विशिष्ट आयोजनों/अवसरों का आडंबरधर्मी प्रतीक बनकर ही रह गया है। गांव के उन्नायकों को स्वजाति अवंटक/अल्ल विशेष की लकीर पर डटे रहने के बजाय इस दिशा में समय के अनुसार अद्यतन करते रहना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हो पाता। अपनी सांस्कृतिक धरोहरों पर गर्व करना अच्छी बात है, पर उन्हें जानना जरूरी है कि इनका चलन किस आधार पर चला। परंपरा को जाने बगैर कोई भी उसका समुचित सम्मान नहीं कर सकता।
👉इस प्रकार भरनाकलां गांव में पहले से प्रचलित बड़ा थोक दश विसा (१४ पाग)+पल्ला थोक{ढाई विसा+सवा विसा (१४)}=२८ । भरनाकलां गांव में "पाग" बरगला/नुक्ते (अल्ल/अवंटक) के कुछ परिवारों को पारंपरिक तौर पर दी जाती रही है । ये निम्नलिखित हैं -
🔸दश विसा के पागों (पागियों की) संख्या:-
1 अटावाले
2 मुकदम परिवार
1 हडीला परिवार
1 फरसा वाले
1 सट्ठा परिवार
2 पचौरी परिवार
1 मुखिया जी
1 मोहन गुरु जी
1 भैमी परिवार
1 अटीलेवाले
2 मिश्री बाबा
Total= 14
🔸ढाई विसा और सवा विसा (दोनों थोक):-
2 नैवासी, 1 कुसैंड़ा, 3 सेलवारे, 1 लम्बरदार, 2 मुकदम , 1 खिल्लू बाबा, 3 नंदा बाबा, 1 कमरावाले ।
Total= 14
🔸इसके अतिरिक्त भरनाकलां गांव में इटोइयां उपगोत्र (अल्ल/अवंटक) के हर परिवार की भी अपनी एक पाग है। इस परंपरा का निर्वाह अभी हाल के कुछ ही वर्षों से हुआ है। इनकी संख्या शायद २४ अथवा ३६ है।
▪️पागधारकों को नेग/उपहार बतौर कुछ ना कुछ देने का रिवाज है- यह विवाह आदि के शुभ अवसरों पर कुछ धन/ वर्तन आदि देने की प्रथा है। कुछ हिस्सा, भेंट, शादी ब्याह में रिश्तेदारों से मिलने वाली शगुन की कुछ राशि इन पागधारियों को बतौर सम्मान दी जाती है । गांव, गोत्र, सतगामा, अठगामा, बारहा(बारह गाँव), खाप तथा पाल़ आदि के चौधरियों को भी हरियाणवी लोकजीवन में पगड़ी बांधने की परंपरा रही है, इतना ही नहीं, यहां पर ब्याह-शादी तथा अन्य अवसरों पर रूठे हुओं को मनाने के लिए पगड़ी उतारकर अंतिम प्रयास के रूप में मनाने की परम्परा अब भी कहीं-न-कहीं दिखाई पड़ती है। राजस्थान में भी पाग अन्य राज्यों से अधिक प्रचलन में है।
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✍️ अपने गांव के कुछ तथ्यों को जानना अच्छी बात है जैसे हमारे गांव का नाम भरनाकलां है इसका अर्थ क्या है? भरनाकलां शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है, भरना और कलां, भरना का मतलब है स्थापना और कलां शब्द फारसी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ होता है बड़ा । इस प्रकार भरनाकलां का अर्थ होता है बड़ी स्थापना या बड़ी बस्ती। जैसे छोटा भरना या भरनाखुर्द जिसका अर्थ है छोटी बस्ती। ये शाब्दिक अर्थ है लेकिन समय/काल के चलते वर्तमान में इन नामों (कलां/खुर्द)के गांव की जनसंख्या कम - ज़्यादा हो सकती है।
किसी गांव का नाम सुनने पर स्वाभाविक जिज्ञासा होती है कि उसका नाम कैसे पड़ा होगा । अमूमन हम इन प्रश्नों को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन जब हम ऐसा करते हैं तो क्या उस स्थान से जुड़े ऐतिहासिक-सांस्कृतिक संदर्भों को विस्मृति की खाई में नहीं धकेल देते हैं लेकिन इतिहास के मामले में कई बार हम इतने अभिजनवादी हो जाते हैं कि अपने ही पूर्वजों के इतिहास को नजरअंदाज कर जाते हैं । उनकी जिजीविषा और ज्ञान परंपरा से खुद को दूर कर लेते हैं । किसी गांव के नाम की व्युत्पत्ति के द्वारा उसके इतिहास को समझने की कोशिश के बहुत कम उदाहरण हैं । हमारे जनमानस में यह बात बैठी हुई है कि किसी स्थान या जगह को राजा-महाराजा या प्रभुत्वशाली लोगों द्वारा ही बसाया जाता है । ऐसा नहीं है ये कोई भी हो सकते हैं लेकिन हैं तो हमारे पूर्वज या उनसे संबंधित।
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